कोलंबो, सिकंदर रजा (127) के कॅरियर की सर्वश्रेष्ठ पारी और मैल्कम वालर (68) और ग्रीम क्रेमर (48) की उपयोगी पारियों की मदद से जिम्बाब्वे ने श्रीलंका के खिलाफ एकमात्र टेस्ट की अपनी दूसरी पारी में 377 रन बनाए। इससे मेजबान श्रीलंका को जीत के लिए कमजोर जिम्बाब्वे ने 388 रन का मुश्किल लक्ष्य दिया। अगर श्रीलंकाई टीम यह लक्ष्य हासिल करने में सफल रही तो यह श्रीलंका में चौथी पारी में लक्ष्य का पीछा करते हुए सबसे बड़ी जीत होगी। इससे पहले यहां पर सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड पाकिस्तान के नाम है, जिसने 2015 में श्रीलंका के खिलाफ 382 रन का लक्ष्य हासिल किया था।

सिकंदर रजा और मैल्कम वालर ने सातवें विकेट के लिए 144 रन की अविजित साझेदारी की बदौलत ही जिम्बाब्वे मेजबान श्रीलंका को यह लक्ष्य देने में कामयाब रहा है। यह जिम्बाब्वे की ओर से सातवें विकेट के लिए दूसरी सबसे बड़ी साझेदारी है। इस विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारी 2001 में एडम ब्लिगनॉट और हीथ स्ट्रीक ने वेस्टइंडीज के खिलाफ हरारे में 154 रन की की थी।

जिम्बाब्वे ने एक समय अपने पांच विकेट मात्र 59 रन पर खो दिए थे, लेकिन रजा ने 127, पीटर मूर ने 40 और वालर ने 68 रन बनाकर टीम को उबार लिया। रजा ने मूर के साथ छठे विकेट के लिए 86 रन और फिर वालर के साथ सातवें विकेट के लिए 144 जोड़ डाले। रजा ने अपने कॅरियर की पहली टेस्ट शतकीय पारी में 205 गेंदों का सामना किया। जिसमें उन्होंने नौ चौके और एक छक्का लगाया। श्रीलंका की ओर से लेफ्ट आर्म स्पिनर रंगना हेरात ने 133 रन पर छह विकेट लिए और इस मैच में अपने विकेटों की संख्या 11 पहुंचा दी। दिलरुवान परेरा ने तीन विकेट झटके।