जयपुर, प्रदेश में संचालित राष्ट्रीय परिवार कल्याण कार्यक्रम में क्वालिटी, काउंसलिंग एवं गर्भनिरोधक साधनों की डिमांड-सप्लाई प्रणाली पर विशेष फोकस रखते हुए वार्षिक कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिये गये हैं। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में परामर्श सेवाओं को बढ़ावा देने सहित गुणवत्तापूर्ण परिवार नियोजन सेवाओं को जिलास्तरीय कार्ययोजना में शामिल कर क्रियान्यन सुनिश्चित किया जायेगा।

स्वास्थ्य सचिव एवं मिशन निदेशक एनएचएम नवीन जैन ने गुरूवार को झालाना डूंगरी स्थित राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान में आयोजित राष्ट्रीय परिवार कल्याण कार्यक्रम की राज्यस्तरीय कार्ययोजना निर्माण एवं समीक्षा बैठक में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राष्ट्र के चहूमुखी विकास में जनसंख्या स्थिरीकरण एक अहम् पहलू है एवं प्रदेश में इस वर्ष सुनियोजित रिजल्ट आॅरिएंटेड परिवार कल्याण कार्ययोजना बनाकर समयबद्ध लागू किया जायेगा। उन्होंने सभी जिलों से आये परिवार कल्याण कार्यक्रम के नोडल अधिकारियों को उपलब्ध चिकित्सीय संसाधनों सहित लाभार्थियों की आवश्यकताओं को भी शामिल करते हुए जिला कार्य योजना बनाने के निर्देश दिये।

जैन ने बताया कि वर्ष 2016-17 में 2 लाख से अधिक प्रसूताओं द्वारा प्रसव पश्चात् आईयूसीडी अपनाया है जोकि एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इस वर्ष परामर्श सेवाएं पर विशेष जोर देकर पीपीआईयूसीडी का लाभ अधिक से अधिक प्रसूताओं को उपलब्ध कराया जायेगा। उन्होंने बताया कि इन्जेक्टेबल अस्थायी गर्भनिरोधक साधन ‘अंतरा‘ की सुविधा मिशन परिवार विकास कार्यक्रम वाले 14 जिलों में उपस्वास्थ्य केन्द्र स्तर तक तथा अन्य 20 जिलों के जिला चिकित्सालय में इनकी सुविधा दी जा रही है। उन्होंने स्वास्थ्यकार्मिकों को इसके बारे में आवश्यक प्रशिक्षण यथासमय देने के निर्देश दिये। प्रदेशभर में गर्भनिरोधक साधनों के कुशल प्रबन्धन के लिए ई-साधन आॅनलाईन साॅफ्टवेयर का उपयुक्त उपयोग कर प्रभावी डिमांड व सप्लाई प्रक्रिया सुनिश्चित करने के निर्देश दिये हैं।

बैठक में निदेशक परिवार कल्याण डाॅ.वी.के.माथुर, परियोजना निदेशक परिवार कल्याण डाॅ. ओ.पी.कुलहरी, सभी जिलों के डिप्टी सीएमएचओ परिवार कल्याण सहित डवलपमेंट पार्टनर यूएनएफपीए, यूनीसेफ, नीपि एवं पार्थ फाइन्डर के प्रतिनिधीगण मौजूद थे।